रायपुर | ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने नया रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में पत्रकारों से चर्चा करते हुए विभागीय उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि राज्य को देश की ऊर्जा राजधानी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं और उत्पादन, पारेषण व वितरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
डॉ. यादव ने बताया कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 30,671.7 मेगावाट है, जिसमें 28,824 मेगावाट ताप विद्युत, 220 मेगावाट जल विद्युत और 2,047 मेगावाट सौर व अन्य नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन में कमी और नेट जीरो लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
राज्य में पंप स्टोरेज परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए 2023 की नीति लागू की गई है। 8,300 मेगावाट क्षमता के छह स्थलों का चिन्हांकन किया गया है, जबकि निजी क्षेत्र में 5,000 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं पर कार्य जारी है। इसके अलावा 32,100 मेगावाट नई परियोजनाओं के लिए विभिन्न संस्थाओं के साथ एमओयू किए गए हैं, जिनमें ताप, न्यूक्लियर, फ्लोटिंग सोलर और पंप स्टोरेज परियोजनाएं शामिल हैं। इनसे लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।
पारेषण क्षेत्र में उपकेंद्रों की संख्या 132 से बढ़कर 137 हो गई है और 5,200 किमी ऑप्टिकल फाइबर ग्राउंड वायर बिछाकर 131 उपकेंद्रों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा गया है। वितरण क्षेत्र में उपभोक्ताओं की संख्या 65 लाख से अधिक हो चुकी है।
प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना, पीएम कुसुम और किसान विद्युत सहायता योजना से लाखों उपभोक्ताओं को लाभ मिल रहा है। क्रेडा के माध्यम से हजारों सोलर पंप और हाईमास्ट स्थापित किए गए हैं। डॉ. यादव ने कहा कि संतुलित ऊर्जा मिश्रण और तकनीकी आधुनिकीकरण के जरिए छत्तीसगढ़ को ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी बनाया जाएगा।