Friday, April 10, 2026
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आजीविका मिशन से बदली रमशीला कश्यप की जिंदगी, किराना दुकान से बनीं आत्मनिर्भर

श्रीमती रमशीला कश्यप, जिन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर अपने जीवन को नई दिशा दी और आज सफल उद्यमी के रूप में पहचान बना ली है।

by News Desk
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रायपुर, कभी माओवाद से प्रभावित रहा कोंडागांव जिले का दूरस्थ ग्राम कुधुर आज विकास और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन रहा है। इस बदलाव की एक प्रेरक कहानी हैं ग्राम की निवासी श्रीमती रमशीला कश्यप, जिन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर अपने जीवन को नई दिशा दी और आज सफल उद्यमी के रूप में पहचान बना ली है।

रमशीला कश्यप ने वर्ष 2018 में ‘जय मां दंतेश्वरी’ स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर पहला कदम बढ़ाया। उस समय गांव में केवल एक ही किराना दुकान थी, जिससे ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए करीब 20 किलोमीटर दूर मर्दापाल जाना पड़ता था। इस समस्या को समझते हुए रमशीला ने गांव में ही किराना दुकान खोलने का निर्णय लिया।

स्व-सहायता समूह से मिली 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता से उन्होंने अपने छोटे से व्यवसाय की शुरुआत की। धीरे-धीरे उन्होंने ग्राहकों की जरूरत के अनुसार सामान बढ़ाया और अपने कारोबार को मजबूत किया। उनकी मेहनत और लगन का परिणाम है कि आज उनकी दुकान पूरे गांव के लिए एक बड़ी सुविधा बन गई है।

रमशीला कश्यप वर्तमान में अपनी किराना दुकान से हर महीने लगभग 20 से 25 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पहले केवल खेती पर निर्भर रहने वाला परिवार अब अतिरिक्त आय के जरिए अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बन चुका है।

उनकी यह सफलता न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे गांव और आसपास की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। रमशीला अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर रोजगार शुरू करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

रमशीला कश्यप ने इस उपलब्धि के लिए शासन की योजनाओं और प्रशासन के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। उनकी कहानी यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी सफलता की नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।

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