Friday, February 20, 2026
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बस्तर की बिहान दीदियां तैयार कर रहीं हर्बल गुलाल, इस होली घुलेंगे कुदरती रंग

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत बस्तर जिले की स्व-सहायता समूहों की महिलाएं प्राकृतिक संसाधनों से हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं।

by khabariya
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रायपुर , इस बार बस्तर में होली के रंग सिर्फ सतरंगे ही नहीं, बल्कि सेहत और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित होंगे। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत बस्तर जिले की स्व-सहायता समूहों की महिलाएं प्राकृतिक संसाधनों से हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ लोगों को रसायनमुक्त रंगों का विकल्प उपलब्ध करा रही है।

हर्बल गुलाल बनाने के लिए सब्जियों और फूलों के प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जा रहा है। पलाश के फूलों से केसरिया, पालक भाजी से हरा और लाल भाजी से लाल रंग का गुलाल तैयार किया जा रहा है। इसके साथ गुलाब, गेंदा, गुलाब जल और इत्र मिलाकर इसे सुगंधित और आकर्षक बनाया जा रहा है। चूंकि इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक पदार्थ का उपयोग नहीं होता, इसलिए यह त्वचा, आंखों और बालों के लिए सुरक्षित है।

जिले के विभिन्न विकासखंडों के 9 स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को क्रांतिकारी डेबरीधूर उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, जगदलपुर में दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में महिलाओं को कॉर्न फ्लावर बेस में चुकंदर, पालक और अन्य प्राकृतिक अर्क मिलाकर वैज्ञानिक तरीके से गुलाल तैयार करना सिखाया गया।

बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंगों से होने वाली एलर्जी और त्वचा संबंधी समस्याओं को देखते हुए यह पहल खास महत्व रखती है। महिलाओं ने इस वर्ष 500 से 1000 किलो तक हर्बल गुलाल उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसके विक्रय के लिए जगदलपुर शहर के प्रमुख स्थानों, शासकीय कार्यालयों और स्थानीय बाजारों में स्टॉल लगाए जाएंगे।

बिहान दीदियों के लिए यह पहल केवल रंग बनाने का कार्य नहीं, बल्कि स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे जहां उनकी आय में वृद्धि होगी, वहीं लोगों को सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल होली मनाने का अवसर मिलेगा।

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