Saturday, April 11, 2026
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कॉमन्स सम्मेलन का समापन: जनजातीय आस्था से प्रकृति संरक्षण मजबूत, टास्क फोर्स गठन की तैयारी

मंत्री नेताम ने कहा कि देश में 10 करोड़ से अधिक जनजातीय आबादी निवास करती है, जिनका जीवन प्रकृति से गहराई से जुड़ा है।

by News Desk
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रायपुर, नवा रायपुर स्थित जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित दो दिवसीय ‘छत्तीसगढ़ कॉमन्स क्विनिंग’ सम्मेलन का समापन जनजातीय आस्था और सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण के संदेश के साथ हुआ। समापन समारोह में आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि जनजातीय समुदायों की प्रकृति के प्रति गहरी आस्था ही जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत है।

मंत्री नेताम ने कहा कि देश में 10 करोड़ से अधिक जनजातीय आबादी निवास करती है, जिनका जीवन प्रकृति से गहराई से जुड़ा है। वे पेड़-पौधों, नदियों और पहाड़ों में देवी-देवताओं का वास मानते हैं, यही कारण है कि उनके पारंपरिक जीवन में संरक्षण और संवर्धन स्वाभाविक रूप से शामिल है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में हुए मंथन से प्राप्त सुझावों को राज्य सरकार नीति निर्माण में शामिल करेगी।

उन्होंने घोषणा की कि पेसा और वनाधिकार अधिनियम (FRA) के बेहतर क्रियान्वयन के लिए एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता स्वयं मुख्यमंत्री करेंगे। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के समन्वय के लिए एक विशेष कार्यान्वयन समिति भी बनाई जाएगी। सीमांकन जैसी व्यावहारिक समस्याओं के समाधान पर भी प्राथमिकता दी जाएगी।

प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि जल, जंगल, जमीन केवल संसाधन नहीं बल्कि जनजातीय संस्कृति का आधार हैं। उन्होंने बताया कि दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में 300 से अधिक विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और ग्राम प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा का केंद्र राज्य की लगभग 70 लाख एकड़ कॉमन्स भूमि रही, जो ग्रामीण जीवन की जीवनरेखा है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक वी. श्रीनिवास राव ने सामुदायिक भागीदारी को वन संरक्षण के लिए अनिवार्य बताया, वहीं मनरेगा आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा ने जल प्रबंधन में जनभागीदारी पर जोर दिया।

सम्मेलन में यह निष्कर्ष सामने आया कि कॉमन्स केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का भी महत्वपूर्ण आधार हैं। कार्यक्रम में जनजातीय लोक परंपराओं के संरक्षण के लिए विशेष स्टूडियो स्थापित करने की योजना भी साझा की गई।

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