रायपुर, 12 दिसंबर 2025:
विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के विज़न के अनुरूप राज्य ने बीते दो वर्षों में तेज़ी से बुनियादी ढांचे का विस्तार करते हुए भारत का नया ग्रोथ इंजन बनने की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। रक्षा, आईटी, एआई और ग्रीन एनर्जी जैसे नए क्षेत्रों के लिए बनाई गई औद्योगिक नीति को अब तक ₹7.69 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य में विकास, भरोसे और सुरक्षा का नया वातावरण बना है। लंबे समय से विकास में बाधा रहे माओवाद का प्रभाव अब कमजोर पड़ चुका है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रशासनिक सुधारों को गति देने के लिए ‘गुड गवर्नेंस एंड कन्वर्जेन्स विभाग’ का गठन किया गया है। 1 दिसंबर 2025 से मंत्रालय में अधिकारियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू कर अनुशासन और समयबद्धता को सुनिश्चित किया गया है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में नव निर्मित विधानसभा भवन का लोकार्पण राज्य के लोकतांत्रिक इतिहास का गौरवपूर्ण क्षण रहा। यह भवन विकसित छत्तीसगढ़ के नए संकल्प का प्रतीक माना जा रहा है।
बस्तर और सरगुजा जैसे पिछड़े क्षेत्रों के लिए सड़क, रेल, स्वास्थ्य एवं संचार से जुड़े कई प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने के बाद बस्तर में होमस्टे नीति और इको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। उद्योगों के लिए विशेष रियायतें और सस्ती भूमि उपलब्ध कराई जा रही है।
नियेड नेल्ला नार योजना के तहत 69 सुरक्षा कैंप माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएँ प्रदान कर रहे हैं। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम ने इस क्षेत्र में शांति और बदलाव के नए संकेत दिए हैं। युवा अब पर्यटन, ऑटोमोबाइल, पायलटिंग और आईटी जैसे क्षेत्रों में स्किल डेवलपमेंट के ज़रिये रोजगार से जुड़ रहे हैं।
सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में राज्य ने जल जीवन मिशन के तहत 40 लाख घरों में स्वच्छ पेयजल, PMAY के तहत 26 लाख घरों की स्वीकृति और महतारी वंदन योजना के माध्यम से 70 लाख महिलाओं को आर्थिक सहयोग प्रदान किया है। आयुष्मान भारत का लाभ 98% आबादी तक पहुँच चुका है।
राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़—धान उत्पादन—को मजबूती देते हुए किसानों को ₹3,100 प्रति क्विंटल का देश में सर्वाधिक मूल्य दिया जा रहा है। अब तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक राशि किसानों के खातों में स्थानांतरित की जा चुकी है, जिससे कृषि और बाजार दोनों में आर्थिक उछाल आया है।
