रायपुर, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल की संयुक्त अध्यक्षता में नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री श्री पाटिल वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए। इस दौरान विभिन्न जिलों के कलेक्टरों ने अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जल संकट केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। उन्होंने जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने पर जोर देते हुए प्रदेशवासियों से जल को प्रसाद की तरह सम्मान देने और जिम्मेदार सोच अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि अभियान के पहले चरण में छत्तीसगढ़ को देशभर में दूसरा स्थान मिला था और कई जिलों को पुरस्कार भी प्राप्त हुए थे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दूसरे चरण में 31 मई 2026 तक 10 लाख जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने इसे जल सुरक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। राज्य में 5 क्रिटिकल और 21 सेमी-क्रिटिकल भू-जल ब्लॉक चिन्हित हैं, जहां विशेष फोकस के साथ कार्य किए जा रहे हैं। क्रिटिकल ब्लॉकों में 65 प्रतिशत और सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों में 40 प्रतिशत जल संरक्षण कार्यों का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि चार लाख से अधिक किसानों को अपने खेतों में डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे भू-जल स्तर बढ़ेगा और सिंचाई व मछली पालन जैसी अतिरिक्त सुविधाएं मिलेंगी। सभी जल संरचनाओं की जियोटैगिंग, ग्राम पंचायतों के वॉटर बजट और युवाओं को “जल मित्र” के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना भी बनाई गई है।
केंद्रीय मंत्री श्री पाटिल ने छत्तीसगढ़ के प्रयासों की सराहना करते हुए जनभागीदारी बढ़ाने और मनरेगा संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर बल दिया। बैठक में वरिष्ठ अधिकारी और सभी जिलों के कलेक्टर उपस्थित रहे।