
रायपुर | 24 जनवरी 2026
रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के दूसरे दिन लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित परिचर्चा ‘राष्ट्रीय मीडिया में बहस के मुद्दे’ ने मीडिया की वर्तमान दिशा, उसकी प्राथमिकताओं और भविष्य की चुनौतियों पर गंभीर मंथन का अवसर प्रदान किया। यह सत्र छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय रमेश नैयर को समर्पित रहा। परिचर्चा का संचालन वरिष्ठ पत्रकार वरुण सखा ने किया।
वरिष्ठ पत्रकार अनिल पाण्डेय ने कहा कि राष्ट्रीय मीडिया में राजनीति का बढ़ता कवरेज एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने बताया कि एक समय सिनेमा और मनोरंजन की खबरें प्रमुख रहती थीं, लेकिन अब राजनीतिक विमर्श केंद्र में आ रहा है। उन्होंने सरकार से प्रेस आयोग या मीडिया आयोग के गठन की मांग करते हुए कहा कि समयानुकूल नीतियां और नियमन पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज टीवी चैनलों के प्राइम टाइम डिबेट के विषय सोशल मीडिया तय कर रहा है, जो चिंता का विषय है। पत्रकारों के संवेदनशील, अध्ययनशील और प्रशिक्षित होने पर उन्होंने विशेष जोर दिया।
वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ से जुड़ी नक्सल घटनाओं को तो राष्ट्रीय मीडिया में प्रमुखता मिलती है, लेकिन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हो रहे सकारात्मक बदलावों और विकास कार्यों को अपेक्षित स्थान नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को पंचायत से संसद तक मजबूत बनाने की जिम्मेदारी मीडिया की है और अखबार व पत्रिकाएं भी टीवी जितनी ही महत्वपूर्ण हैं।
वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी ने मीडिया की व्यावहारिक चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि जमीनी पत्रकारिता खर्चीली होती जा रही है, जबकि प्रायोजित कंटेंट और डिबेट आसान विकल्प बन गए हैं। उन्होंने चिंता जताई कि पत्रकारिता धीरे-धीरे समाज से जुड़ी जिम्मेदारी से हटकर केवल कंटेंट जेनरेशन तक सीमित होती जा रही है।
परिचर्चा में यह भी कहा गया कि पत्रकारिता शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण की कमी है, जिसे दूर करना समय की मांग है। यह सत्र मीडिया आत्ममंथन और संतुलित पत्रकारिता की आवश्यकता को रेखांकित करता दिखा।