Sunday, March 22, 2026
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छत्तीसगढ़ में बड़ा सियासी और प्रशासनिक घटनाक्रम: बृजमोहन अग्रवाल और सरकार आमने-सामने, राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी पर संकट

भारत स्काउट एवं गाइड से जुड़े राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी आयोजन और उससे संबंधित वित्तीय लेन-देन को लेकर उत्पन्न हुआ है।

by khabariya
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रायपुर।
छत्तीसगढ़ में एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद सामने आया है, जहां पूर्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल तथा राज्य सरकार आमने-सामने नजर आ रहे हैं। मामला भारत स्काउट एवं गाइड से जुड़े राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी आयोजन और उससे संबंधित वित्तीय लेन-देन को लेकर उत्पन्न हुआ है।

सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है, जब आयोजन से जुड़ी 10 करोड़ रुपये की राशि के हस्तांतरण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि यह राशि भारत स्काउट एवं गाइड के खाते में स्थानांतरित करने के बजाय जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के खाते में ट्रांसफर की गई, जिसे वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि बृजमोहन अग्रवाल पूर्व में भारत स्काउट एवं गाइड, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष रह चुके हैं। ऐसे में यह मामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण पर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है, जिसमें जंबूरी को औपचारिक रूप से स्थगित करने की पुष्टि हो।

छत्तीसगढ़ में भारत स्काउट एवं गाइड संगठन का अध्यक्ष पदेन रूप से राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री होते हैं। इस कारण विभागीय जिम्मेदारी और वित्तीय प्रक्रिया को लेकर सरकार की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जानकारों का कहना है कि यदि राशि का हस्तांतरण निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं हुआ है, तो इसकी विस्तृत जांच की आवश्यकता होगी।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अभी तक राज्य सरकार ने राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी को स्थगित करने को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। विभागीय स्तर पर दस्तावेजों की समीक्षा की जा रही है और स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही कोई आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक ओर स्काउट-गाइड जैसे अनुशासित और सेवा-आधारित संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज कर दी है। अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम और संभावित जांच पर टिकी हुई हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि मामला प्रशासनिक चूक है या वास्तव में कोई वित्तीय अनियमितता।

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