Home » विधानसभा में जल जीवन मिशन और गिग वर्कर्स पर गरमाई बहस, कार्यों की गुणवत्ता और कानून बनाने की मांग

विधानसभा में जल जीवन मिशन और गिग वर्कर्स पर गरमाई बहस, कार्यों की गुणवत्ता और कानून बनाने की मांग

छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज जल जीवन मिशन और गिग वर्कर्स के मुद्दे पर जोरदार बहस देखने को मिली।

by News Desk
0 comments

रायपुर, विधानसभा।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज जल जीवन मिशन और गिग वर्कर्स के मुद्दे पर जोरदार बहस देखने को मिली। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के साथ कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए गए।

सबसे पहले कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने जल जीवन मिशन के तहत संजारी बालोद क्षेत्र में स्वीकृत कार्यों की स्थिति पर प्रश्न किया। उन्होंने स्वीकृत, पूर्ण और अपूर्ण कार्यों की विस्तृत जानकारी मांगी। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने जवाब देते हुए क्षेत्र में स्वीकृत योजनाओं, पूर्ण हो चुके कार्यों और प्रगति पर चल रहे प्रोजेक्ट्स की जानकारी सदन में रखी।

हालांकि संगीता सिन्हा ने अपूर्ण और गुणवत्ताहीन कार्यों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने पूछा कि अधूरे कार्य कब तक पूरे होंगे और जिन स्थानों पर निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं, वहां क्या कार्रवाई की गई है। इस पर अरुण साव ने कहा कि यदि गुणवत्ताहीन निर्माण की ठोस जानकारी दी जाए तो सरकार आवश्यक कार्रवाई करेगी।

जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन को लेकर दोनों पक्षों के विधायकों के बीच तीखी बहस हुई। सत्तापक्ष के कुछ विधायकों ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय पूरे प्रदेश में योजनाओं की यही स्थिति थी। वहीं कांग्रेस विधायकों ने वर्तमान सरकार से समयबद्ध कार्य पूर्ण कराने की मांग की। विधायक उमेश पटेल ने भी जल जीवन मिशन के तहत की गई कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर जानकारी चाही।

इसी दौरान सदन में गिग वर्कर्स का मुद्दा भी गूंजा। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकइट और रैपिडो जैसी कंपनियों में कार्यरत युवाओं की स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि छत्तीसगढ़ में इन कंपनियों का पंजीकरण है या नहीं तथा इनके अधीन कार्यरत गिग वर्कर्स की संख्या, भर्ती प्रक्रिया, योग्यता और वेतन निर्धारण संबंधी जानकारी क्या है।

मंत्री लखनलाल देवांगन ने बताया कि श्रम विभाग के अंतर्गत स्विगी और जोमैटो जैसी कंपनियां पंजीकृत नहीं हैं। साथ ही गिग वर्कर्स के संबंध में सरकार के पास स्पष्ट आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। उद्योग मंत्री ने कहा कि ये वर्कर्स न तो पारंपरिक संगठित क्षेत्र में आते हैं और न ही असंगठित क्षेत्र की श्रेणी में स्पष्ट रूप से परिभाषित हैं।

अजय चंद्राकर ने कहा कि यदि इन कंपनियों को अधिनियमित किया जाए तो हजारों युवाओं को रोजगार सुरक्षा मिल सकती है। उन्होंने गिग वर्कर्स को शोषण से बचाने के लिए कानून या नियम बनाने की मांग की। इस पर मंत्री ने बताया कि इस विषय पर एक समिति गठित की गई है और प्रक्रिया जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल किसी राज्य में गिग वर्कर्स पर अलग से अधिनियम लागू नहीं है।

सदन में उठे इन दोनों मुद्दों ने स्पष्ट किया कि जल जीवन मिशन की गुणवत्ता और गिग इकोनॉमी में कार्यरत युवाओं की सुरक्षा आने वाले समय में राज्य की प्रमुख नीति चर्चाओं का केंद्र बन सकती है।

You may also like