Wednesday, June 3, 2026
Home » पिलखा डैम में ‘मुस्कान’ की सफलता: बोटिंग से आत्मनिर्भर बनीं महिलाएं, लिखी सशक्तिकरण की नई कहानी

पिलखा डैम में ‘मुस्कान’ की सफलता: बोटिंग से आत्मनिर्भर बनीं महिलाएं, लिखी सशक्तिकरण की नई कहानी

पिलखा डैम की शांत जलराशि पर चलने वाली नावें केवल पर्यटकों को सैर नहीं करातीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के संघर्ष, आत्मविश्वास और सफलता की कहानी भी बयां करती हैं।

by News Desk
0 comments

रायपुर, छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक कहानी सामने आई है। पहाड़गांव स्थित पिलखा डैम में बोटिंग गतिविधि का संचालन कर रही मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की मिसाल बन गई हैं। कभी घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं अब पर्यटन क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रही हैं।

पिलखा डैम की शांत जलराशि पर चलने वाली नावें केवल पर्यटकों को सैर नहीं करातीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के संघर्ष, आत्मविश्वास और सफलता की कहानी भी बयां करती हैं। समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता सिंह और सचिव श्रीमती यशोदा दास के नेतृत्व में 10 महिलाओं ने मिलकर बोटिंग व्यवसाय की शुरुआत की और आज यह पहल आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बन चुकी है।

शुरुआती दौर में संसाधनों की कमी, तकनीकी जानकारी का अभाव और संचालन संबंधी कई चुनौतियां सामने थीं। हालांकि महिलाओं ने इन बाधाओं को अपनी प्रगति में रुकावट नहीं बनने दिया। उन्होंने बोटिंग संचालन, सुरक्षा प्रबंधन और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी स्वयं संभाली और निरंतर प्रयासों से इस पहल को सफल बनाया।

आज पिलखा डैम आने वाले पर्यटक बोटिंग का आनंद लेने के साथ इन महिलाओं के प्रयासों की भी सराहना करते हैं। समूह अब तक 74 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित कर चुका है। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उनके आत्मविश्वास तथा सामाजिक सम्मान में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

समूह की सदस्य बताती हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे पर्यटन गतिविधियों का संचालन करेंगी और स्वयं रोजगार सृजित करेंगी। आज वे न केवल अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि आसपास की महिलाओं को भी स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित कर रही हैं।

मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की यह उपलब्धि साबित करती है कि अवसर, प्रशिक्षण और आत्मविश्वास मिलने पर ग्रामीण महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं। पिलखा डैम की लहरों पर चलती यह पहल अब महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की एक प्रेरक मिसाल बन चुकी है।

You may also like