रायपुर, छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का मिनपा क्षेत्र, जो कभी नक्सलवाद और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकास से दूर माना जाता था, आज स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। सीमित संसाधनों और कठिन हालात के बीच शुरू हुआ मिनपा उप स्वास्थ्य केंद्र अब राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों तक पहुंचकर सेवाभाव और संकल्प की मिसाल बन गया है।
एक समय ऐसा था जब यहां एक छोटी सी झोपड़ी में स्वास्थ्य सेवाएं संचालित होती थीं। कठिन जंगलों और पहुंचविहीन रास्तों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने गांव-गांव जाकर मरीजों का इलाज किया और लगातार स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से लोगों में जागरूकता बढ़ाई।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की योजनाओं के चलते वर्ष 2024 में मिनपा में नया उप स्वास्थ्य केंद्र भवन तैयार किया गया। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित इस केंद्र में प्रयोगशाला कक्ष, आवश्यक स्वास्थ्य उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ की व्यवस्था की गई है।
आज यह स्वास्थ्य केंद्र मिनपा सहित दुलेड़, एलमागुंडा, भटपाड़, पोट्टेमडगू, टोंडामरका और गुंडराजपाड़ जैसे दूरस्थ गांवों के लगभग 3,593 ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत बना हुआ है। यहां के स्वास्थ्य कर्मचारी कठिन जंगल रास्तों से होकर गांवों तक पहुंचते हैं। कई बार वापसी संभव नहीं होने पर वे गांवों में रुककर ‘नाइट कैंप’ लगाते हैं और रात में भी मरीजों का उपचार करते हैं।
स्वास्थ्य कर्मियों की इसी मेहनत का परिणाम है कि आज मिनपा उप स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन 15 से 20 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। हर महीने यहां लगभग 4 सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों का भरोसा स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ा है।
मिनपा स्वास्थ्य केंद्र ने 15 मई 2026 को ‘राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक’ (NQAS) कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा कर राष्ट्रीय पहचान हासिल की। यह उपलब्धि मितानिन, एएनएम, सीएचओ, सुपरवाइजर और जिला प्रशासन के सामूहिक प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।
मिनपा की यह कहानी दिखाती है कि मजबूत इच्छाशक्ति, सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और कर्मचारियों की निष्ठा से दुर्गम क्षेत्रों में भी विकास की नई रोशनी पहुंचाई जा सकती है।