Sunday, May 24, 2026
Home » दिल्ली में साहित्यिक परिचर्चा: विनोद कुमार शुक्ल को किया गया याद, रायपुर साहित्य उत्सव 2026 की वैचारिक रूपरेखा पर संवाद

दिल्ली में साहित्यिक परिचर्चा: विनोद कुमार शुक्ल को किया गया याद, रायपुर साहित्य उत्सव 2026 की वैचारिक रूपरेखा पर संवाद

रायपुर में 23 से 25 जनवरी 2026 तक प्रस्तावित रायपुर साहित्य उत्सव के संदर्भ में कांस्टीट्यूशन क्लब, नई दिल्ली में यह परिचर्चा आयोजित की गई।

by News Desk
0 comments

न्यूज़ डेस्क, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में आयोजित साहित्यिक परिचर्चा में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के रचना-कर्म और साहित्यिक योगदान को भावपूर्ण स्मरण के साथ याद किया गया। इस अवसर पर साहित्य उत्सवों की प्रासंगिकता और उनके वैचारिक उद्देश्य को लेकर साहित्यकारों के बीच गहन संवाद भी हुआ।

रायपुर में 23 से 25 जनवरी 2026 तक प्रस्तावित रायपुर साहित्य उत्सव के संदर्भ में कांस्टीट्यूशन क्लब, नई दिल्ली में यह परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य रायपुर साहित्य उत्सव की वैचारिक दिशा को सुदृढ़ करना और समकालीन साहित्य से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर विचार-विमर्श करना रहा।

परिचर्चा में डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने विनोद कुमार शुक्ल से जुड़ी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि वे जितने बड़े साहित्यकार थे, उतने ही सरल और सहज व्यक्तित्व के धनी भी थे। उनकी बातचीत में आत्मीयता और स्पष्टता झलकती थी, जो उनके लेखन की भी प्रमुख विशेषता रही।

छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल युवाओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय थे। उन्होंने बताया कि बाल साहित्य की ओर उनका रुझान नई पीढ़ी के साथ संवाद स्थापित करने की इच्छा से प्रेरित था।

साहित्यकार अलका जोशी ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल की रचनाएं साधारण जीवन स्थितियों में भी गहरे सौंदर्य और प्रतिरोध को अभिव्यक्त करती हैं। उनकी कृतियों में पाठक की भावनात्मक भागीदारी ही उनकी रचनात्मक सफलता की पहचान है।

साहित्य उत्सवों पर चर्चा करते हुए लेखक अनंत विजय ने कहा कि किसी भी साहित्य उत्सव की सार्थकता उसके कंटेंट और संरचना पर निर्भर करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रायपुर साहित्य उत्सव व्यावसायिकता से दूर रहकर साहित्य को केंद्र में रखेगा।

वहीं, साहित्यकार अनिल जोशी और लेखक प्रताप सोमवंशी ने नई और पारंपरिक लेखन शैलियों की निरंतरता और साहित्य से नई पीढ़ी के बढ़ते जुड़ाव को सकारात्मक संकेत बताया।

इस अवसर पर रायपुर साहित्य उत्सव समिति के सदस्य, वरिष्ठ साहित्यकार और विचारक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

You may also like