रायपुर, एक भीषण विद्युत हादसे ने नर्मदा प्रसाद यादव की जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया था। प्लास्टिक कंपनी में काम कर परिवार का सहारा बने नर्मदा प्रसाद अचानक ऐसी दुर्घटना का शिकार हुए, जिसने उन्हें पूर्ण रूप से दिव्यांग बना दिया। हादसे के बाद उनका चलना-फिरना बंद हो गया और परिवार गहरे आर्थिक व मानसिक संकट में घिर गया।
लेकिन इसी कठिन दौर में शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं उनके लिए नई उम्मीद बनकर सामने आईं। प्रशासन की संवेदनशील पहल ने नर्मदा प्रसाद को फिर से आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ने का हौसला दिया।
दुर्घटना के बाद नर्मदा प्रसाद ने ग्राम पंचायत के माध्यम से ट्राई साइकिल के लिए आवेदन किया। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की और बिना अनावश्यक देरी के उन्हें ट्राई साइकिल उपलब्ध कराई। इस सहायता ने उनकी जिंदगी की रुकी रफ्तार को फिर से गति दे दी।
अब नर्मदा प्रसाद को अपनी दैनिक जरूरतों और आने-जाने के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। ट्राई साइकिल मिलने के बाद उनके भीतर आत्मविश्वास भी लौटा है। इसके साथ ही परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए उनकी दिव्यांग पेंशन की प्रक्रिया भी तेज गति से पूरी की जा रही है। प्रशासन के अनुसार जल्द ही उनके बैंक खाते में नियमित पेंशन राशि पहुंचने लगेगी।
नर्मदा प्रसाद कहते हैं कि हादसे के बाद उन्हें लगा था कि अब जिंदगी पूरी तरह दूसरों के सहारे ही कटेगी, लेकिन शासन की योजनाओं ने उन्हें फिर से जीने का साहस दिया। उनका कहना है कि यह सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने वाला सहारा है।
उन्होंने शासन और प्रशासन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि संकट के समय मिली यह मदद उनके परिवार के लिए बड़ी राहत साबित हुई है। यह कहानी बताती है कि संवेदनशील प्रशासन और प्रभावी योजनाएं किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।