रायपुर, कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा बीजापुर अब विकास, विश्वास और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनता जा रहा है। राज्य शासन की पुनर्वास नीति और जिला प्रशासन की सतत पहल से यहां पुनर्वासित परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत सिलाई प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।
बीजापुर जिले की पुनर्वासित महिलाओं को स्थानीय गारमेंट फैक्ट्री में आधुनिक सिलाई और परिधान निर्माण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को मशीन संचालन, कपड़ा डिजाइनिंग और सिलाई की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है, ताकि वे रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें। खास बात यह है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन्हें उसी फैक्ट्री में रोजगार भी उपलब्ध कराया जाएगा।
प्रशासन के अनुसार प्रशिक्षण पूर्ण करने वाली महिलाओं को प्रतिमाह लगभग 5 से 8 हजार रुपये तक का पारिश्रमिक मिलेगा। इससे वे न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होंगी, बल्कि अपने परिवार की जिम्मेदारियों में भी अहम भूमिका निभा सकेंगी।
मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना से जुड़ी महिलाएं अब आत्मविश्वास के साथ भविष्य की ओर बढ़ रही हैं। जो महिलाएं कभी असुरक्षा और हिंसा के माहौल में जीवन बिता रही थीं, वे अब सम्मानजनक रोजगार और बेहतर जीवन की उम्मीद के साथ आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं का कहना है कि शासन की इस पहल ने उन्हें नई पहचान और आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है।
जिला प्रशासन का मानना है कि यह पहल केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि पुनर्वासित परिवारों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रभावी माध्यम भी बन रही है। शिक्षा, कौशल विकास और स्वरोजगार के जरिए बीजापुर में विकास की नई तस्वीर उभर रही है।
नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में चल रही ऐसी योजनाएं अब बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। बीजापुर की महिलाएं यह साबित कर रही हैं कि सही अवसर और सहयोग मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है।