Sunday, March 22, 2026
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रायपुर साहित्य उत्सव 2026: संविधान, भारतीय मूल्यों और चेतना पर गहन विमर्श

रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के अंतिम दिन भारतीय साहित्य और विचार परंपरा को समर्पित एक विशेष संवाद का आयोजन किया गया।

by khabariya
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रायपुर | 25 जनवरी 2026

रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के अंतिम दिन भारतीय साहित्य और विचार परंपरा को समर्पित एक विशेष संवाद का आयोजन किया गया। यह संवाद प्रख्यात साहित्यकार बच्चू जांजगीरी को समर्पित रहा, जिसमें ‘संविधान और भारतीय मूल्य’ विषय पर गहन बौद्धिक चर्चा हुई। कार्यक्रम में वरिष्ठ चिंतक शिव प्रकाश, हितेश शंकर और वरिष्ठ साहित्यकार गुरुप्रकाश ने संविधान की आत्मा, उसकी सांस्कृतिक जड़ों और समकालीन सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। संवाद का संचालन डॉ. भूपेंद्र करवंदे ने किया।

वरिष्ठ चिंतक शिव प्रकाश ने भारतीय सहिष्णुता को केवल “स्वीकार” तक सीमित न मानते हुए उसे समावेश और संवाद की परंपरा बताया। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के शिकागो धर्म संसद के ऐतिहासिक संबोधन और रामकृष्ण परमहंस के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय दर्शन सभी पंथों को एक ही सत्य की ओर जाने वाले मार्ग मानता है। उन्होंने शास्त्रार्थ की परंपरा को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्राचीन रूप बताया। कोरोना काल में भारत द्वारा अनेक देशों को वैक्सीन सहायता देने का उदाहरण देते हुए उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ को व्यवहार में उतरा हुआ मूल्य बताया।

वरिष्ठ साहित्यकार गुरुप्रकाश ने कहा कि संविधान का मंदिर संसद है और उसका गर्भगृह भावनात्मक आस्था है। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान की सफलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। उन्होंने मौलिक कर्तव्यों के पालन को राष्ट्र निर्माण की अनिवार्य शर्त बताया।

वहीं वरिष्ठ साहित्यकार हितेश शंकर ने संविधान के राजनीतिक उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीयता का भाव ही संविधान की आत्मा है। उन्होंने अंबेडकर के जीवन, 42वें संविधान संशोधन और स्वतंत्रता के बाद के घटनाक्रमों का संदर्भ देते हुए विचार रखे।

इस अवसर पर डॉ. लुनेश कुमार वर्मा के काव्य संग्रह ‘एक लोटा पानी’ और चंचल विजय शुक्ला की पुस्तक ‘माटी के लाल: शहीदों को श्रद्धांजलि’ का विमोचन भी किया गया। यह सत्र रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का बौद्धिक और वैचारिक शिखर साबित हुआ।

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