Sunday, May 3, 2026
Home » धान छोड़ गेंदा की खेती से चमकी किस्मत, रायगढ़ के किसान आनंदराम ने कमाए 3 लाख रुपए

धान छोड़ गेंदा की खेती से चमकी किस्मत, रायगढ़ के किसान आनंदराम ने कमाए 3 लाख रुपए

वर्ष 2025-26 में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने करीब 44 क्विंटल गेंदा फूल का उत्पादन किया।

by News Desk
0 comments

रायपुर। छत्तीसगढ़ के किसान अब परंपरागत खेती से आगे बढ़कर नवाचार की राह पर चल रहे हैं। रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड स्थित कोड़केल गांव के किसान आनंदराम सिदार ने धान की खेती छोड़ गेंदा फूल की खेती अपनाकर सफलता की नई मिसाल पेश की है। उनकी यह सफलता अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

पहले आनंदराम सिदार पारंपरिक धान की खेती करते थे। 10 क्विंटल धान उत्पादन से उन्हें लगभग 31 हजार रुपये की कुल आय होती थी, जिसमें लागत निकालने के बाद सिर्फ 22 हजार रुपये का मुनाफा बचता था। सीमित आय के कारण आर्थिक चुनौतियां बनी रहती थीं।

इसी बीच राष्ट्रीय बागवानी मिशन और उद्यानिकी विभाग की ‘गेंदा क्षेत्र विस्तार योजना’ से जुड़कर उन्होंने खेती में बदलाव का फैसला किया। विभाग से तकनीकी मार्गदर्शन, उन्नत बीज और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण मिलने के बाद उन्होंने 0.400 हेक्टेयर भूमि पर गेंदा फूल की खेती शुरू की।

वर्ष 2025-26 में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने करीब 44 क्विंटल गेंदा फूल का उत्पादन किया। बाजार में बिक्री से उन्हें 3 लाख रुपये से अधिक की आमदनी हुई। यानी धान की तुलना में कई गुना अधिक लाभ। कम समय में ज्यादा मुनाफा मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और परिवार का जीवनस्तर भी बेहतर हुआ।

आनंदराम बताते हैं कि शुरुआत में फूलों की खेती को लेकर संकोच था, लेकिन उद्यानिकी विभाग के विशेषज्ञों के सहयोग और वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के कारण जोखिम कम हुआ और परिणाम उम्मीद से बेहतर मिले।

उनकी सफलता का असर अब पूरे इलाके में देखने को मिल रहा है। रायगढ़ जिले के कई किसान धान की जगह गेंदा और अन्य नगदी फसलों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत किसानों को लगातार प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे फूलों की खेती एक टिकाऊ और लाभकारी व्यवसाय के रूप में उभर रही है।

आनंदराम सिदार की कहानी यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और नई सोच के साथ किसान कम लागत में बेहतर आमदनी हासिल कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

You may also like