जबलपुर। बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में कई लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कुछ अब भी लापता बताए जा रहे हैं। सबसे मार्मिक दृश्य वह था, जब बचाव दल ने मां और उसके मासूम बेटे का शव एक साथ बाहर निकाला। यह तस्वीर हादसे की भयावहता और सिस्टम की संवेदनहीनता को बयां करती है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे से करीब चार घंटे पहले मौसम विभाग ने तेज आंधी-तूफान की चेतावनी जारी कर दी थी। इसके बावजूद क्रूज संचालन नहीं रोका गया। बताया जा रहा है कि हवा की रफ्तार 74 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक पहुंच गई थी, फिर भी क्रूज को डैम में उतारा गया।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद डीजल से चलने वाले क्रूज का संचालन जारी था। सुरक्षा मानकों का पालन भी सवालों के घेरे में है। कई यात्रियों ने लाइफ जैकेट नहीं पहन रखी थी और इस नियम को सख्ती से लागू नहीं कराया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आंधी शुरू होने और पानी अंदर आने के बाद भी यात्रियों की चेतावनी को नजरअंदाज कर क्रूज आगे बढ़ाया गया।
हादसे के बाद प्रशासन की ओर से जांच के आदेश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की बात कही है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी या वास्तव में जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित विभागों पर कार्रवाई होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि लापरवाही का परिणाम होती हैं। यदि मौसम चेतावनी को गंभीरता से लिया जाता और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित होता, तो शायद कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
अब पीड़ित परिवारों और आम लोगों की मांग है कि केवल मुआवजा देकर मामले को खत्म न किया जाए, बल्कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जाए।