Wednesday, March 18, 2026
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हमारे हनुमान

हनुमान जी बहुत ही सौम्य ,सरल,निश्छल,वीर ,बलशाली ,बुद्धिमान और समर्पण से भरे हुए देव है,इन्हे ही अमरत्व का वरदान प्राप्त है।

by khabariya
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हमारे हनुमान

         रामचरितमानस का प्रतयेक हिन्दू के जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसी रामचरितमानस में ढेर सारे पात्र है और यह हमें अपने जीवन को देखने का एक अलग नजरिया  देते  है,साथ ही  इसके ढेर सारे पात्र हमें अपने जीवन की संगरचना और निर्वहन का मार्गदर्शन देते है। हर पत्र की एक उपलब्धि और स्थान है चाहे वो लक्ष्मण का भाई के प्रति समर्पण , राम जी का शांत स्वभाव और आज्ञा का पालन करने वाला पुत्र,शबरी का समर्पण,सुग्रीव की वचनबधिता या केवट का सहयोग,पर इन सब मई नसे किसी को भी संसार में लोकप्रियता या स्वीकृति नहीं मिली राम जी को छोड़।

          राम जी भी एक राजकुल में जन्मे और ढेर सारे गुण और आदर्श जिसे लोगो ने सहर्ष स्वीकारा ,उनके राजा  बनने के बाद उनके आदर्श,मर्यादा का अनुसरण करना लोगो ने उन्हें मर्यदापुर्षोत्तम का नाम दिया और जीवन में एक ऊँचा स्थान दिया इनके मंदिर बने और इसमें सीता माता ,लक्ष्मण जी इनके साथ ही रहे।

        अगर किसी को अपने आचरण ,वीरता ,गुण ,उपलब्धियां और स्वभाव के कारण पुरे विश्व में लोकप्रियता मिलीं,जिनके हर नुक्कड़ ,गली ,घर में मंदिर बने,जिनके जीवन को लोगो ने अपने जीवन से जोड़ हर क्षण कुछ सीखा या ठीक किया ,हिंदुत्व में उनका सिन्दूर ही धर्म का प्रतिरूप बन गया वो है हमारे हनुमान।

          हनुमान जी बहुत ही सौम्य ,सरल,निश्छल,वीर ,बलशाली ,बुद्धिमान और समर्पण से भरे हुए देव है,इन्हे ही अमरत्व का वरदान प्राप्त है।

संकर सुवन केसरीनंदन

तेज प्रताप महा जग बंदन

हनुमान जी का जन्म माता अंजनी और वानर राज केसरी के यहाँ हुआ “शिवांश” होते हुए भी वे बालपन से बेहद चंचल,बुद्धिमान थे ,साथ ही उनका व्यक्तित्व,आचरण ,प्रकृति बालपन से ही विशिष्ठ थे।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।

हनुमान जी ढृण इच्छा शक्ति के धनी है ,इसका उद्धारहण हमें उनके बालरूप में सूर्य देव को एक मीठा फल समझकर आहार बना लेना या फिर सीता माता की खबर लेने की जरुरत पड़ी तो हनुमान जी ही एक छलांग में सेकड़ो मीलो का सफर कर लिए।

 अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ।

 अस बर दीन जानकी माता ॥

हनुमान जी बेहद ही बुद्धिमान और विलक्षण प्रतिभा के धनी है , जिसके लिए उन्हें खूब कठिनायों का सामना करना पड़ा जिसे पार कर वे सूर्य देव से शिक्षा प्राप्त किये।  इसके पश्चात् समस्त देवताओं ने भी हनुमान जी को विशेष शक्तियो से अलंकृत किया।

   सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।

बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥

हनुमान जी  स्वभाव से बेहद सरल और सौम्य है वे हमेशा हर किसी को आदर देते और कभी भी अपनी शक्तियों का दुरूपयोग या दिखावा नहीं किया ,कोई भी कार्य प्रारम्भ करने के पहले बड़ो को प्रणाम करते और जब माता सीता का कुशलक्षेम लेने लंका गए थे तो अपने सूक्षम रूप का परिचय दिया वही थोड़े ही क्षणो के पश्चात अपने विक्राल रूप का परिचय दिया।

राम काज करिबे को आतुर ॥

हनुमान जी हर पल राम जी का कार्य करने में आतुर होते है चाहे वो राम जी का सन्देश ले कर लंका जाना हो या फिर संजीवनी बूटी लाना हो,वो प्रत्येक कार्य को उसकी गरिमा के अनुरूप की पूर्ण करते है। कभी भी उन्होंने अपने पद की गरिमा को धूमिल नहीं होने दिया या उसकी सीमाओं का उल्हंगन किया,वरना वे पूर्ण रूप से सक्षम थे रावण का हरण करने में ,लव कुश की अश्वमेघ यात्रा हो।

    भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।

    महाबीर जब नाम सुनावै ॥

हनुमान जी बेहद ही वीर है और उनकी वीरता मेँ कोई भी उनके सम नहीं। इसका उदहारण हमें विभिन्न साहित्यों मे देखने को मिलता है चाहे हनुमान जी की विद्या प्राप्ति की कठिनाइयां ,बालपन में अपने मित्रो के जीवन को राक्षसों से बचाना। फिर कुछ वर्षो के पश्चात् अंजना माता को वापस लाना। राम जी और लक्ष्मण जी के मुर्छित होने पर अहिरावण से युद्ध कर पाताल लोक से लाना। राम जी का संदेश ले कर लंका जाने पर उनकी पुछ को आग लगाने पर संपूर्ण लंका को दहन करना।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।

तुम रक्षक काहू को डर ना ॥

हनुमान जी बेहद ही कोमल ह्रदय के है ,जो भी उनकी  शरण में जाता है वे उसको रक्षा करते है,वे किसी भी प्रकार का भेद न रख सहायता मे तत्पर रहते है।

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ।

    राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥

हनुमान जी से इस रचना के अंत में यही प्राथना है की समस्त प्राणियों की रक्षा करे। समस्त पाठको से यही सुझाव है की हनुमान जी से प्रेरणा ले अपने मन,ह्रदय,इच्छा को नियंत्रण कर,ध्यान, योग के ओर अग्रसर हो जिससे अपने कार्यो को शांत मन से पूर्ण कर सके। जीवन में कैसी भी स्थिति आने पर  अपने इष्ट का स्मरण ,गुरु का मार्गदर्शन नहीं भूलना चाहिए।

और जब कुछ समझ ना आये या रास्ता का अंत लगे तो फिर है ना —  हमारे हनुमान

 

सन्दर्भ : हनुमान चालीसा एक सर्वव्यापी ,सर्वप्रिय ग्रन्थ है,जिससे हनुमान जी के समस्त गुणु और उनके सन्देश  को जनमानस तक एक बहुत ही सरल तरीके से पंहुचाया है।

हनुमान जी का जीवन हमें सिखाता है कि यदि मन में भक्ति, साहस, विनम्रता और सेवा का भाव हो तो व्यक्ति असंभव कार्य भी कर सकता है। इसलिए आज भी लोग हनुमान जी को संकटमोचन और शक्ति के प्रतीक के रूप में पूजते हैं।

 

विक्रमादित्या वर्मा.

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