Sunday, May 3, 2026
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बाल हितैषी पंचायत में कछिया नंबर-1, छत्तीसगढ़ में रचा कीर्तिमान; मुख्यमंत्री साय ने दी बधाई

सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण के तहत आयोजित पीएआई 2.0 सर्वेक्षण में ग्राम पंचायत कछिया ने 9 थीम में से थीम-3 ‘बाल हितैषी पंचायत’ में 95.71 अंक प्राप्त कर पूरे छत्तीसगढ़ में शीर्ष स्थान हासिल किया।

by News Desk
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में पंचायत सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयास अब जमीनी स्तर पर सफलता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के जनपद पंचायत वाड्रफनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत कछिया ने बाल हितैषी पंचायत के क्षेत्र में प्रदेशभर में प्रथम स्थान हासिल कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण के तहत आयोजित पीएआई 2.0 सर्वेक्षण में ग्राम पंचायत कछिया ने 9 थीम में से थीम-3 ‘बाल हितैषी पंचायत’ में 95.71 अंक प्राप्त कर पूरे छत्तीसगढ़ में शीर्ष स्थान हासिल किया। यह उपलब्धि न केवल बलरामपुर जिले बल्कि पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय बन गई है।

इस ऐतिहासिक सफलता पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और जिले की प्रभारी मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ग्राम पंचायत कछिया के जनप्रतिनिधियों, पंचायत अमले और ग्रामीणों को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने इसे जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल और “सबका साथ, सबका विकास” की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

ग्राम पंचायत कछिया ने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक समग्र बाल हितैषी वातावरण तैयार किया है। पंचायत के प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में कुल 155 बच्चे अध्ययनरत हैं, जिनमें बालिकाओं की उल्लेखनीय भागीदारी है। पंचायत ने बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, स्कूलों में उपस्थिति बढ़ाने, पोषण सुधार और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं।

विद्यालयों का नियमित निरीक्षण, स्कूल प्रबंधन समितियों के साथ समन्वय, सुरक्षित पेयजल व्यवस्था, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान और ग्रामसभा में बच्चों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देना इस सफलता की बड़ी वजह रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों के सहयोग से पंचायत ने शत-प्रतिशत टीकाकरण, एनीमिया मुक्त अभियान और मातृ-पोषण कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू किया।

शुरुआती दौर में पलायन, आर्थिक चुनौतियां और जागरूकता की कमी बड़ी बाधाएं थीं, लेकिन पंचायत ने घर-घर संपर्क, अभिभावक संवाद और सामुदायिक सहभागिता से इन चुनौतियों को पार किया। अब पंचायत ने शत-प्रतिशत नामांकन, शून्य ड्रॉपआउट और नियमित मॉनिटरिंग का लक्ष्य तय किया है, जो अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणा बन रहा है।

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