Sunday, May 3, 2026
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मणिपुर बम हमले के 24 दिन बाद भी बच्चों का अंतिम संस्कार नहीं, परिवार बोला- हमें न्याय चाहिए

इस घटना के विरोध में मैतेई समुदाय की महिलाएं नेशनल हाईवे-202 पर पिछले 24 दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रही हैं।

by News Desk
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इंफाल। मणिपुर में 7 अप्रैल को हुए बम हमले में मारे गए दो मासूम बच्चों के शव 24 दिन बाद भी मुर्दाघर में रखे हुए हैं। ट्रोंगलाओबी गांव में हुए इस हमले में 5 साल के बच्चे और उसकी 6 महीने की बहन की जान चली गई थी। घटना के बाद से परिवार गहरे सदमे में है और न्याय की मांग को लेकर अंतिम संस्कार करने से इनकार कर रहा है।

बच्चों के दादा बाबुटन ओइनाम का कहना है कि उन्हें मुआवजा नहीं, बल्कि दोषियों की गिरफ्तारी और सजा चाहिए। उनका आरोप है कि सरकार ने जिन लोगों की गिरफ्तारी का दावा किया है, वे पहले से ही जेल में बंद थे। ऐसे में असली हमलावर कौन हैं, यह अब भी स्पष्ट नहीं है। परिवार का कहना है कि जब तक वास्तविक आरोपियों को पकड़कर सजा नहीं दी जाती, तब तक वे बच्चों का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।

घटना के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है। हालांकि, अब तक जांच में ठोस प्रगति सामने नहीं आई है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार और पुलिस इस मामले में पूरी जानकारी साझा नहीं कर रही हैं।

इस घटना के विरोध में मैतेई समुदाय की महिलाएं नेशनल हाईवे-202 पर पिछले 24 दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रही हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने अभी तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं दी है और न ही कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने आया है।

गौरतलब है कि मणिपुर पिछले कुछ वर्षों से जातीय हिंसा की आग में झुलस रहा है। मई 2023 में शुरू हुए मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच संघर्ष ने राज्य में व्यापक अस्थिरता पैदा की थी। कई लोग विस्थापित हुए और हिंसा की घटनाएं लंबे समय तक जारी रहीं।

फरवरी 2026 में नई सरकार के गठन के बाद लोगों को हालात सुधरने की उम्मीद थी, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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