Saturday, May 2, 2026
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बारनवापारा में काले हिरणों की वापसी, छत्तीसगढ़ बना वन्यजीव संरक्षण का राष्ट्रीय मॉडल

फरवरी 2026 में 30 काले हिरणों को ‘सॉफ्ट रिलीज’ पद्धति के जरिए उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया।

by News Desk
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रायपुर। छत्तीसगढ़ का बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य आज वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिकी बहाली का राष्ट्रीय उदाहरण बनकर उभरा है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित इस अभ्यारण्य में काले हिरणों (ब्लैकबक) की सफल वापसी ने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश में संरक्षण प्रयासों की नई मिसाल पेश की है।

करीब पांच दशक पहले, 1970 के दशक में बारनवापारा से काले हिरण लगभग विलुप्त हो चुके थे। लेकिन 2018 में शुरू हुई पुनरुद्धार योजना और वैज्ञानिक प्रयासों के चलते अब इनकी संख्या बढ़कर करीब 200 तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ में इस उपलब्धि का उल्लेख कर इसे राष्ट्रीय स्तर पर सराहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य के वन विभाग, विशेषज्ञों और स्थानीय समुदायों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

फरवरी 2026 में 30 काले हिरणों को ‘सॉफ्ट रिलीज’ पद्धति के जरिए उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। इस प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया गया कि हिरण बिना तनाव के नए वातावरण में सहजता से ढल सकें। बेहतर पोषण, वैज्ञानिक निगरानी और सुरक्षित वातावरण ने इनके संरक्षण को सफल बनाया।

बारनवापारा के रामपुर ग्रासलैंड का वैज्ञानिक प्रबंधन, जल स्रोतों का पुनर्जीवन और स्थानीय घास प्रजातियों का संरक्षण इस सफलता के अहम आधार रहे हैं। साथ ही हाई-टेक निगरानी, जीपीएस ट्रैकिंग और नियमित पेट्रोलिंग से इनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन सकता है। काले हिरण, जो खुले घास के मैदानों में पाए जाने वाले संकटग्रस्त मृग हैं, अब बारनवापारा में फिर से स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं।

यह सफलता बताती है कि वैज्ञानिक रणनीति, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी के समन्वय से खोई हुई प्राकृतिक धरोहर को वापस लाया जा सकता है। बारनवापारा आज प्रकृति संरक्षण की एक जीवंत मिसाल बन चुका है।

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